भारतीय किसान यूनियन कार्ड (Bhartiya kisan union card) क्या है? जानिए लाभ, प्रक्रिया और सच्चाई

भारत में किसान योजनाओं, संगठनों और कार्डों की भीड़ में अक्सर उलझ जाता है। कभी किसान क्रेडिट कार्ड, कभी पीएम किसान, और अब सवाल उठता है — भारतीय किसान यूनियन कार्ड (Bhartiya kisan union card) आखिर होता क्या है?
क्या यह सरकारी कार्ड है?
क्या इससे सब्सिडी या पैसा मिलता है?
इस ब्लॉग में बिना घुमा-फिरा कर पूरी तस्वीर साफ़ करते हैं।
भारतीय किसान यूनियन कार्ड क्या है?
भारतीय किसान यूनियन (BKUI) (Bhartiya kisan union card) एक किसान संगठन है, जो लंबे समय से किसानों के अधिकारों, फसल के दाम, गन्ना भुगतान, बिजली बिल, ज़मीन विवाद और कृषि नीतियों के खिलाफ आवाज़ उठाता रहा है।
इस संगठन से जुड़े किसानों को जो पहचान पत्र दिया जाता है, वही भारतीय किसान यूनियन कार्ड (Bhartiya kisan union card) कहलाता है।
👉 ध्यान देने वाली बात:
यह कोई सरकारी कार्ड नहीं है।
यह केवल भारतीय किसान यूनियन की सदस्यता का प्रमाण है।
भारतीय किसान यूनियन कार्ड (Bhartiya kisan union card) का उद्देश्य

इस कार्ड का मुख्य मकसद है:
- किसान को संगठन की पहचान देना
- सामूहिक रूप से किसान समस्याओं को उठाना
- प्रशासन और सरकार के सामने किसान की आवाज़ मजबूत करना
- आंदोलन, पंचायत और बैठकों में भागीदारी सुनिश्चित करना
सीधे शब्दों में कहें तो यह कार्ड किसान को अकेले से “संगठित” बनाता है।
भारतीय किसान यूनियन कार्ड (Bhartiya kisan union card) के फायदे
हालाँकि यह कोई सरकारी योजना नहीं है, फिर भी इसके कुछ व्यावहारिक फायदे हैं:
1. संगठन का समर्थन
अगर किसान की समस्या प्रशासन नहीं सुन रहा, तो यूनियन उसके पक्ष में ज्ञापन, धरना या बातचीत कर सकती है।
2. किसान आंदोलनों में भागीदारी
BKU द्वारा किए जाने वाले आंदोलनों और बैठकों में कार्डधारी किसान की भागीदारी आसान होती है।
3. सामूहिक दबाव
कई मामलों में अफसर किसान को टाल देते हैं, लेकिन जब यूनियन सामने आती है तो मामला तेज़ी से आगे बढ़ता है।
4. किसान की पहचान
गांव और तहसील स्तर पर यह कार्ड बताता है कि किसान किसी संगठन से जुड़ा है।
क्या भारतीय किसान यूनियन कार्ड (Bhartiya kisan union card) से सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है?
यह सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला सवाल है।
स्पष्ट जवाब — नहीं।
इस कार्ड से:
- पीएम किसान सम्मान निधि
- फसल बीमा
- किसान क्रेडिट कार्ड
- सरकारी सब्सिडी
सीधे नहीं मिलती।
लेकिन अगर इन योजनाओं में:
- पैसा अटका हो
- नाम कट गया हो
- अधिकारी सुनवाई न कर रहे हों
तो यूनियन दबाव बनाकर मदद कर सकती है।
भारतीय किसान यूनियन कार्ड (Bhartiya kisan union card) कैसे बनवाएं?
इसकी प्रक्रिया बहुत सीधी और ज़मीनी है:
- अपने क्षेत्र की भारतीय किसान यूनियन इकाई से संपर्क करें
- सदस्यता फ़ॉर्म भरें
- आवश्यक जानकारी दें (नाम, पता, खेती विवरण आदि)
- मामूली सदस्यता शुल्क जमा करें
- इसके बाद यूनियन द्वारा BKU कार्ड जारी किया जाता है
अभी ज़्यादातर जगह यह प्रक्रिया ऑनलाइन नहीं है।
क्या हर किसान को यह कार्ड बनवाना चाहिए?
यह ज़रूरी नहीं है, लेकिन उपयोगी हो सकता है।
अगर आप:
- किसान समस्याओं पर संगठित आवाज़ चाहते हैं
- आंदोलन या पंचायत में सक्रिय रहना चाहते हैं
- अकेले अफसरों के चक्कर काटकर थक चुके हैं
तो यह कार्ड आपके काम का हो सकता है।
लेकिन अगर आप इसे सरकारी योजना समझकर बनवाना चाहते हैं, तो निराशा हाथ लगेगी।
भारतीय किसान यूनियन कार्ड (Bhartiya kisan union card) से जुड़ी सच्चाई
ईमानदारी से कहें तो:
- हर जगह इस कार्ड की ताक़त समान नहीं होती
- कहीं यह मज़बूत संगठन है, कहीं नाम भर
- यह व्यक्तिगत सुरक्षा नहीं, सामूहिक संघर्ष का प्रतीक है
काग़ज़ से ज़्यादा मायने उस संगठन की सक्रियता के होते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
क्या भारतीय किसान यूनियन कार्ड (Bhartiya kisan union card) सरकारी है?
नहीं, यह पूरी तरह गैर-सरकारी संगठन का कार्ड है।
क्या इससे पैसा मिलता है?
नहीं, यह कोई आर्थिक योजना नहीं है।
क्या यह आधार कार्ड की तरह मान्य है?
नहीं, यह केवल संगठन की पहचान है।
क्या इसे ऑनलाइन बनवाया जा सकता है?
अधिकतर जगह नहीं। स्थानीय यूनियन से संपर्क करना पड़ता है।
निष्कर्ष
भारतीय किसान यूनियन कार्ड कोई चमत्कारी समाधान नहीं है, लेकिन यह किसान को अकेले से संगठित जरूर करता है।
यह कार्ड नहीं, बल्कि सामूहिक आवाज़ की चाबी है।
अगर सही संगठन, सही नेतृत्व और सही इस्तेमाल हो —
तो यह छोटा सा कार्ड बड़ी लड़ाइयों में काम आ सकता है।